Gold Price Friday शुक्रवार को सोने और चांदी की कीमतों में हलचल देखने को मिली है। सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन होने के कारण शुक्रवार का रेट पूरे हफ्ते के रुझान को दर्शाता है। कई बार निवेशक और ज्वेलरी खरीदार इसी दिन बाजार की दिशा समझकर खरीदारी या निवेश का फैसला लेते हैं।
भारत में सोना केवल गहनों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सुरक्षित निवेश और आर्थिक मजबूती का प्रतीक भी माना जाता है। इसलिए शुक्रवार के भाव पर नजर रखना समझदारी भरा कदम हो सकता है।
शुक्रवार को सोने की कीमत क्यों होती है खास?
शुक्रवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी हलचल ज्यादा रहती है। कई बड़े निवेशक सप्ताह खत्म होने से पहले अपनी पोजीशन क्लोज करते हैं, जिससे कीमतों में उतार-चढ़ाव बढ़ जाता है।
अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में गुरुवार रात तक तेजी रही हो, तो उसका असर शुक्रवार के रेट में दिख सकता है। वहीं डॉलर मजबूत होने या शेयर बाजार में स्थिरता आने पर सोने की कीमतों में गिरावट भी आ सकती है।
18K, 22K और 24K सोने के दाम में अंतर
सोने की कीमत उसकी शुद्धता पर निर्भर करती है।
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24 कैरेट सोना लगभग 99.9% शुद्ध होता है और इसे मुख्य रूप से निवेश के लिए खरीदा जाता है।
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22 कैरेट सोना लगभग 91.6% शुद्ध होता है और इससे गहने बनाए जाते हैं।
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18 कैरेट सोना में अन्य धातुओं का मिश्रण अधिक होता है, इसलिए इसकी कीमत अपेक्षाकृत कम होती है।
कीमत तय करते समय जीएसटी और मेकिंग चार्ज भी जोड़े जाते हैं, जिससे अंतिम बिल बढ़ जाता है। इसलिए केवल बाजार भाव देखना काफी नहीं होता, बल्कि कुल लागत समझना जरूरी है।
सोने के दाम को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारण
सोने की कीमत कई आर्थिक और वैश्विक कारकों पर निर्भर करती है:
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अमेरिकी डॉलर की मजबूती या कमजोरी।
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महंगाई दर और ब्याज दर में बदलाव।
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अंतरराष्ट्रीय बाजार की स्थिति, जैसे London और New York के बुलियन मार्केट का रुख।
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वैश्विक तनाव या आर्थिक अनिश्चितता।
यदि रुपया डॉलर के मुकाबले कमजोर होता है, तो भारत में सोने का आयात महंगा हो जाता है, जिससे कीमतें बढ़ सकती हैं।
निवेश के नजरिए से क्या करें?
अगर आप सोने में निवेश करना चाहते हैं, तो केवल एक दिन की गिरावट या बढ़त देखकर निर्णय न लें। दीर्घकालिक निवेशकों के लिए सोना महंगाई और आर्थिक संकट के खिलाफ सुरक्षा का माध्यम माना जाता है।
आजकल निवेश के कई विकल्प उपलब्ध हैं, जैसे फिजिकल गोल्ड, डिजिटल गोल्ड, गोल्ड ईटीएफ और सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड। डिजिटल माध्यमों में स्टोरेज की समस्या नहीं होती और पारदर्शिता अधिक रहती है।
क्या शुक्रवार को खरीदना सही है?
यदि सप्ताह भर कीमतों में गिरावट आई हो और शुक्रवार को स्थिरता दिखे, तो यह खरीदारी का अवसर हो सकता है। हालांकि, हमेशा अपने बजट और वित्तीय लक्ष्य को ध्यान में रखकर ही फैसला लें।
ज्वेलरी खरीदते समय हॉलमार्क जरूर जांचें और विश्वसनीय विक्रेता से ही खरीदारी करें।
निष्कर्ष
Gold Price Friday केवल सप्ताह का अंतिम रेट नहीं है, बल्कि यह बाजार की दिशा का संकेत भी देता है। 18K से 24K तक के सोने के दाम शुद्धता और बाजार की स्थिति पर निर्भर करते हैं। निवेश या खरीदारी करते समय अंतरराष्ट्रीय बाजार, डॉलर की स्थिति और ब्याज दरों को ध्यान में रखना जरूरी है। सही जानकारी और दीर्घकालिक सोच के साथ सोने में निवेश आपके पोर्टफोलियो को मजबूती दे सकता है।
FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)
1. शुक्रवार को सोने की कीमत में ज्यादा उतार-चढ़ाव क्यों होता है?
शुक्रवार सप्ताह का आखिरी कारोबारी दिन होता है और कई निवेशक अपनी पोजीशन क्लोज करते हैं, जिससे कीमतों में तेजी या गिरावट देखने को मिलती है।
2. 24 कैरेट और 22 कैरेट सोने में क्या अंतर है?
24 कैरेट सोना अधिक शुद्ध होता है और निवेश के लिए उपयुक्त है, जबकि 22 कैरेट सोना गहने बनाने के लिए उपयोग किया जाता है।
3. क्या सोने की कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार से प्रभावित होती है?
हाँ, लंदन और न्यूयॉर्क जैसे अंतरराष्ट्रीय बाजारों के रुझान का सीधा असर भारत में सोने के दाम पर पड़ता है।
4. क्या केवल शुक्रवार का रेट देखकर निवेश करना सही है?
नहीं, निवेश हमेशा दीर्घकालिक दृष्टिकोण से करना चाहिए और केवल एक दिन के भाव पर निर्णय नहीं लेना चाहिए।
5. सोने में निवेश के कौन-कौन से विकल्प उपलब्ध हैं?
फिजिकल गोल्ड, डिजिटल गोल्ड, गोल्ड ईटीएफ और सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड जैसे कई विकल्प उपलब्ध हैं, जिनमें निवेशक अपनी सुविधा के अनुसार निवेश कर सकते हैं।